Sunday, February 3, 2019

तलवाड़ा के पातेला तालाब पर हुई बर्डवॉचिंग


‘एक्सप्लोरिंग बर्ड्स इन बांसवाड़ा’ कार्यक्रम जारी

बांसवाड़ा, 3 फरवरी/ जिले की समृद्ध नैसर्गिक संपदा से जन-जन को रूबरू करवाने के उद्देश्य से जिला पर्यटन उन्नयन समिति एवं परिंदों व पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत वागड़ नेचर क्लब के तत्वावधान में आयोजित हो रहे ‘एक्सप्लोरिंग बर्ड्स इन बांसवाड़ा’ कार्यक्रम के तहत रविवार को तलवाड़ा के पातेला तालाब पर बर्डवॉचिंग की गई। 
क्लब के वरिष्ठ सदस्य दिनेश जैन, जनसंपर्क उपनिदेशक कमलेश शर्मा, वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफर भरत कंसारा, पक्षीप्रेमी हार्दिक लोढ़ा व भुवनेश द्विवेदी ने पातेला तालाब का भ्रमण करते हुए यहां पर शीतकाल व्यतीत करने के लिए आए परिंदों के बारे में जानकारियां संकलित की। इस दौरान दल सदस्यों ने बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी कॉमन व टफटेड पोचार्ड को देखकर खुशी जताई। तालाब पर करीब दस हजार की संख्या में कॉमन कूट्स के साथ सैकड़ों की तादाद में स्पॉट बिल डक्स, ग्रीब्स, विसलिंग टील और अन्य प्रजातियों के स्थानीय पक्षियों को देखा और इनके बारे में जानकारियां संकलित की। यहां पर दल सदस्यों ने क्रेस्टेड बंटिंग, ओरियेन्टल मेकपाई रॉबिन, सिल्वर बिल, व्हाईट ब्रेस्टेड किंगफिशर को भी क्लिक किया। 
इस दौरान दल सदस्यों ने त्रिपुरा संुदरी रोड़ स्थित स्मृति वन का भी अवलोकन किया और यहां पर वॉच टॉवर से समृद्ध जैैव विविधता के बारे में जानकारी संकलित की।








‘वर्ल्ड वेटलेण्ड डे’ पर वागड़ नेचर क्लब का नेचर वॉक


जानकारियां संकलित की, जलाशयों के संरक्षण का लिया संकल्प

बांसवाड़ा, 2 फरवरी/ वर्ल्ड वेटलेण्ड डे के मौके पर शनिवार को जिले में परिंदों व पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत वागड़ नेचर क्लब द्वारा नेचर वॉक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत शहर के समीपस्थ कूपड़ा स्थित जलाशय पर बर्डवॉचिंग की गई और जलाशय से संबंधित जानकारी संकलित की गई। 
इस मौके पर क्लब सदस्यों ने भावी पीढ़ी को हरे-भरे, स्वस्थ व स्वर्णिम भविष्य की सौगात प्रदान करने जिले में माही, सुरवानिया और हरो डेम के साथ चार सौ से अधिक समृद्ध जलाशयों और अन्य वेटलेण्ड्स के संरक्षण के लिए जनचेतना जाग्रत करने के लिए संकल्प लिया गया। क्लब सदस्यों ने इस दौरान बर्डवॉचिंग और फोटोग्राफी भी की तथा इसके माध्यम से जन-जन तक प्रकृति की सुंदर सौगात को संरक्षित करने के लिए जानकारी का संवहन करने की योजना बनाई गई। इस मौके पर क्लब के वरिष्ठ सदस्य दिनेश जैन, जनसंपर्क उपनिदेशक कमलेश शर्मा, वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफर भरत कंसारा, भंवरलाल गर्ग आदि मौजूद थे। 
बनेगी वेटलेण्ड्स पुस्तिका:
वागड़ नेचर क्लब द्वारा इस मौके पर जिले के समस्त समृद्ध जलाशयों की जानकारियों से युक्त एक सूचना पुस्तिका के निर्माण की भी योजना बनाई गई। ‘वेटलेण्ड्स ऑफ बांसवाड़ा’ नाम से तैयार की जाने वाली इस पुस्तिका में जलाशयों और यहां की जैव विविधता के बारे में विस्तृत जानकारी का संकलन होगा। इसके लिए सदस्यों ने उपलब्ध जानकारी को सुव्यवस्थित तरीके से संकलित, संपादित करने की आवश्यकता भी जताई।







Wednesday, December 19, 2018

पेंटेड स्टॉर्क की अदबी उड़ान


डूंगरपुर के आइकन बर्ड है पेंटेड स्टार्क




Monday, December 17, 2018

‘एक्सप्लोरिंग बर्ड्स इन बांसवाड़ा’ का तीसरा सप्ताह

सुंदनी और आसन तालाब पर बर्डवॉचिंग कर संकलित की जानकारियां 
बांसवाड़ा, 2 दिसंबर/ जिले की समृद्ध नैसर्गिक संपदा में पाए जाने वाले स्थानीय और प्रवासी परिंदों की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने और इसके माध्यम से बांसवाड़ा को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दृष्टि से जिला पर्यटन उन्नयन समिति व वागड़ नेचर क्लब के ‘एक्सप्लोरिंग बर्ड्स इन बांसवाड़ा’ कार्यक्रम के तहत रविवार को उदयपुर रोड़ स्थित सुंदनी और आसन तालाब पर बर्डवॉचिंग की गई। 
आसन व संुदनी तालाब पर क्लब के वरिष्ठ सदस्य व नगर स्कूल के प्राचार्य सुशील जैन, वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफर भरत कंसारा, जनसंपर्क उपनिदेशक कमलेश शर्मा, पक्षीप्रेमी भंवरलाल गर्ग, फोटोग्राफर जुगल बेहरानी, रोहित वाधवानी व जय शर्मा के दल ने आज दिनभर बर्डवॉचिंग के साथ पक्षियों के बारे में जानकारियां संकलित की। इसके साथ ही इन स्थानों पर पाई जाने वाली प्रजातियों की फोटोग्राफी भी की गई। 
स्थानीय और प्रवासी परिंदों की जलक्रीड़ाएं देखी: 
बर्डवॉचिंग दौरान दल सदस्यों ने बड़ी संख्या में प्रवासी व स्थानीय पक्षियों की जलक्रीड़ाएं देखी। इस दौरान साइबेरिया व सेंट्रल यूरोप से आने वाला प्रवासी पक्षी गेडवाल, सेंट्रल यूरोप, कजाकिस्तान से आने वाले कॉमन पोचार्ड भी काफी संख्या में दिखाई दिए। आसन तालाब में घास फूंस की अधिकता के कारण स्थानीय पक्षी कॉटन पिग्मी गूज, स्पॉट बिल डक, कूट्स, मुरहैन, किंगफिशर, ब्रोंज विग्ड जैकाना, इजिप्शियन वल्चर, वायरटेल, डबचिक और अन्य पक्षी भी दिखाई दिये। 
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बांसवाड़ा में पहली बार दिखा दुर्लभ प्रवासी पक्षी 'कॉमन शलडक'





आ गए परदेशी पामणे . . .















Friday, December 14, 2018

एक्सप्लोरिंग बर्ड़स इन बांसवाड़ा’ कार्यक्रम जारी

 कूपड़ा तालाब पर हुई बर्डवॉचिंग, यूरोपीयन देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी दिखें 
बांसवाड़ा, 25 नवम्बर/ जिले की समृद्ध नैसर्गिक संपदा में पाए जाने वाले स्थानीय और प्रवासी परिंदों की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने और इसके माध्यम से बांसवाड़ा को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दृष्टि से जिला पर्यटन उन्नयन समिति व वागड़ नेचर क्लब के ‘एक्सप्लोरिंग बर्ड्स इन बांसवाड़ा’ कार्यक्रम के तहत रविवार को कूपड़ा तालाब पर बर्डवॉचिंग की गई। 
शहर के समीपस्थ बर्डवॉचिंग साईट कूपड़ा तालाब पर क्लब के वरिष्ठ सदस्य व नगर स्कूल के प्राचाय्र सुशील जैन, वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफर भरत कंसारा, जनसंपर्क उपनिदेशक कमलेश शर्मा, पक्षीप्रेमी भंवरलाल गर्ग व जय शर्मा के दल ने बर्डवॉचिंग के साथ पक्षियों के बारे में जानकारियां संकलित की। इसके साथ ही इन स्थानों पर पाई जाने वाली प्रजातियों की फोटोग्राफी भी की गई। बर्डवॉचिंग दौरान मध्य यूरोपीयन देशों से आने वाला सफेद आंख वाला सुंदर पक्षी फेरिजुनस पोचार्ड बड़ी संख्या में दिखाई दिया वहीं मानसून के आगमन से पहले-पहले दक्षिण भारत से आने वाला पाईड क्रेस्टेड कूक्कू जिसे स्थानीय बोली में चातक पक्षी कहा जाता है, भी दिखाई दिया। अपने सर पर आकर्षक कलगी वाला यह पक्षी अब वागड़ में बारहो मास दिखाई देने के कारण स्थानीय पक्षी भी माना जाने लगा है।  इसके अतिरिक्त यहां पर बड़ी संख्या में स्थानीय पक्षी स्पोट बिल डक, कूट्स, मुरहैन, किंगफिशर, परपल हैरोन आदि भी दिखाई दिए।
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वागड़ नेचर क्लब का ‘एक्सप्लोरिंग बर्ड्स इन बांसवाड़ा’ कार्यक्रम शुरू

सर्दियों की दस्तक के बाद भी जलाशयों पर इक्का-दुक्का प्रवासी पक्षी  
बांसवाड़ा, 18 नवम्बर/ जिले की समृद्ध नैसर्गिक संपदा में पाए जाने वाले स्थानीय और प्रवासी परिंदों की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने और इसके माध्यम से बांसवाड़ा को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दृष्टि से वागड़ नेचर क्लब का ‘एक्सप्लोरिंग बर्ड्स इन बांसवाड़ा’ कार्यक्रम रविवार से प्रारंभ हुआ। 
कार्यक्रम के तहत रविवार और अन्य अवकाशों के दिनों मंे क्लब से जुड़े स्थानीय बर्डवॉचर्स द्वारा अलग-अलग जलाशयों पर पहुंच कर पक्षियों की प्रजातियों के बारे में जानकारी संकलित की जाएगी और पक्षियों के संरक्षण-संवर्धन के लिए जनसामान्य तक इसको पहुंचाया जाएगा। 
रविवार को इस श्रृंखला में जिला मुख्यालय के बाई तालाब व कागदी पिक-अप पर पर्यावरणप्रेमी व पर्यटन उन्नयन समिति के संरक्षक जगमालसिंह ने, सुरवानिया डेम पर जनसंपर्क उपनिदेशक कमलेश शर्मा तथा कूपड़ा तालाब पर पक्षीप्रेमी भंवरलाल गर्ग ने बर्डवॉचिंग के साथ पक्षियों के बारे में जानकारियां संकलित की। इसके साथ ही इन स्थानों पर पाई जाने वाली प्रजातियों की फोटोग्राफी भी की गई। आगामी दिनों पर इस पर एक आकर्षक फोल्डर तैयार किया जाएगा व प्रदर्शनी लगाई जाएगी।  
सर्दी शुरू पर नहीं पहुंचे प्रवासी परिंदें: 
सर्दियों की दस्तक के साथ आमतौर पर जिले के जलाशयों पर प्रवासी परिंदों का आगमन शुरू होने लगता है परंतु इस बार अब तक जिले के जलाशयों पर इनकी संख्या में बहुत कम बढ़ोत्तरी हुई है। तीनों तालाबों पर स्थानीय पक्षी कूट्स, स्पॉट बिल डक, डबचिक, जैकाना, कॉमन स्टॉन चेट की संख्या ज्यादा पाई गई वहीं प्रवासी पक्षियों में  गेडवाल, ब्लू थ्रोट, शॉवलर इत्यादि ही देखे गए।    
यह है दिखाई दिए पक्षियों की विशेषता: 
उदयपुर के पक्षी विशेषज्ञ विनय दवे बताते है कि प्रवासी पक्षी गेडवाल यूरोप से आता है और इस बार समूचे वागड़-मेवाड़ में यह बहुत कम संख्या में आया है। छिछले पानी को पसंद करने वाला यह पक्षी घास, घोंघे और छोटी मछलियां खाता है। पिछले वर्ष की तुलना में इसकी संख्या बहुत कम दिखाई दंे रही है।  
पक्षी विशेषज्ञ कमलेश शर्मा बताते हैं कि सुरवानिया डेम पर देखा गया ब्लू थ्रोट सर्दियों मंे आने वाला प्रवासी पक्षी है और यह यूरेशिया से यहां आता है। सर्दियों की शुरूआत में ही इसका आगमन होता है। अपने गले के आकर्षक नीले रंग के कारण अन्य पक्षियों से सुंदर दिखने वाले इस पक्षी की विशेषता है कि ज्यों-ज्यों सर्दी बड़ती है  त्यों-त्यों इसके गले का नीला रंग की सुंदरता उभरती जाती है। यह मादा को रिझाने के लिए आकर्षक नृत्य करता है। 
इसी प्रकार कॉमन स्टोन चेट पूर्व में प्रवासी माना जाता था परंतु अब यह सामान्यतया पूरे साल दिख रहा है। यह घास व सरकंडों के ठूंठ पर ही बैठना पसंद करता है और कीट-पतंगों का शिकार करता है। पंखों के खुल जाने पर इसकी सुंदरता बढ़ जाती है। बार-बार एक ही इलाके में आकर बैठना पसंद करता है। 
शिकारी पक्षी ओस्प्रे एक स्थानीय पक्षी है और यह मछलीमार के नाम से भी जाना जाता है। सूखे पेड़ पर घांेसला बनाता है। इसकी संख्या दिनों दिन कम होती जा रही है। मजबूत पंखों वाला यह पक्षी गोता लगाकर मछली पकड़ता है। 
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